राज्य और केन्द्र सरकार ने विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए निजी भूमि के अधिग्रहण को और अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाने के उद्देश्य से म्यूटेशन पोर्टल विकसित करने का निर्णय लिया है। यह पोर्टल भूमि मालिकों को अधिग्रहण प्रक्रिया में दर्ज-खारिज (डाखिल-खारिज) से जुड़ी जानकारी सीधे ऑनलाइन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में भूमि मालिकों को कई स्तरों पर जाकर दस्तावेज़ जमा करने और स्टेटस जानने की आवश्यकता होती थी, जिससे समय और संसाधनों की काफी हानि होती थी। नए म्यूटेशन पोर्टल के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप में संचालित होगी, जिससे आवेदन से लेकर अंतिम मंजूरी तक का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
भूमि अधिग्रहण के बाद दाखिल-खारिज के लिए म्यूटेशन पोर्टल का मुख्य उद्देश्य यह है कि भूमि मालिक को उनके जमीन के मामले में पूर्ण पारदर्शिता और त्वरित जानकारी मिल सके। इससे भूमि विवाद कम होंगे और नागरिकों को समय पर उचित मुआवजा और अन्य कानूनी जानकारी प्राप्त होगी।
पोर्टल के माध्यम से भूमि मालिक अपने दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे और संबंधित अधिकारियों से सीधे संवाद कर सकेंगे। अधिकारियों के लिए भी यह पोर्टल प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और तेजी से निर्णय लेने में सहायक होगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यभार कम होगा बल्कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों और लंबित मामलों में भी कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल म्यूटेशन पोर्टल लागू होने से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और जमीन मालिकों का विश्वास सरकारी प्रक्रिया में मजबूत होगा। इससे परियोजनाओं का कार्य समयबद्ध तरीके से संपन्न करने में भी मदद मिलेगी।
सरकार की योजना है कि म्यूटेशन पोर्टल को जल्द ही विभिन्न राज्यों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें भूमि मालिकों के लिए ऑनलाइन हेल्पडेस्क और मार्गदर्शन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे बिना किसी परेशानी के अपने मामलों की निगरानी कर सकें।
भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता और डिजिटलाइजेशन के इस कदम को नागरिकों और विशेषज्ञों द्वारा स्वागत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और सरकारी परियोजनाओं के कार्यों को तेज गति से पूरा करने में सहायता मिलेगी।
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